Tatpurush Samas ( तत्पुरुष समास ) : तत्पुरुष समास की परिभाषा,भेद और इसके उदाहरण

तत्पुरुष समास (Tatpurush Samas) : परिभाषा, भेद और उदाहरण | Tatpurush Samas in Hindi – इस आर्टिकल में हम तत्पुरुष समास (Tatpurush Samas) , तत्पुरुष समास किसे कहते कहते हैं (Tatpurush Samas Kise Kahate Hain) तत्पुरुष समास की परिभाषा, तत्पुरुष समास के भेदप्रकार और उनके भेदों को उदाहरण के माध्यम से पढ़ेंगे।  इस टॉपिक से सभी परीक्षाओं में प्रश्न पूछे जाते है।  हम यहां पर तत्पुरुष समास ( Tatpurush Samas) के सभी भेदों/प्रकार के बारे में सम्पूर्ण जानकारी लेके आए है। hindi में तत्पुरुष समास ( Tatpurush Samas) से संबंधित बहुत सारे प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं और राज्य एवं केंद्र स्तरीय बोर्ड की सभी परीक्षाओं में यहां से questions पूछे जाते है।  Tatpurush Samas in Hindi के बारे में उदाहरणों सहित इस पोस्ट में सम्पूर्ण जानकारी दी गई है।  तो चलिए शुरू करते है –

Tatpurush Samas

Tatpurush Samas in Hindi

Tatpurush Samas :- समास का शाब्दिक अर्थ है संक्षिप्तीकरण, दो या दो से अधिक शब्दों के योग से समास का निर्माण होता है जैसे – यथाशीघ्र, रसोईघर, नीलकमल आदि।
जिस सामासिक शब्द का उत्तर पद प्रधान होता है उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। इसमें दोनों पदों के मध्य आने वाले परसर्गों (के लिए, को, से, के द्वारा, का, के, की, में, पर) का लोप हो जाता है।
जिस समस्त पद का उत्तरपद प्रधान होता है अर्थात दूसरा शब्द प्रधान होता है वहां तत्पुरुष समास माना जाता है।

तत्पुरुष समास किसे कहते कहते हैं | Tatpurush Samas Kise Kahate Hain

तत्पुरुष समास की परिभाषा – वह समास जिसमें उतरपद या द्वितीय पद अर्थ की दृष्टि से प्रधान होता है, तत्पुरुष समास कहलाता है। 

इस समास का पहला पद प्रायः संज्ञा अथवा विशेषण होता है और इसके विग्रह में इस शब्द के साथ कर्ता और सम्बोधन कारकों को छोड़कर शेष सभी कारकों को विभक्तियाँ लगती है। 

तत्पुरुष समास का लिंग वचन अंतिम पद के अनुसार होता है , तत्पुरुष समास को आप इस प्रकार समझ सकते है ,जैसे – 
हवन सामग्री – हवन के लिए सामग्री 
सत्यपालन – सत्य का पालन 
राजमहल – राजा का महल 

तत्पुरुष समास की परिभाषा | Tatpurush Samas ki Paribhasha

तत्पुरुष समास की परिभाषा | Tatpurush Samas ki paribhasha
वह समास जिसमें उतरपद या द्वितीय पद अर्थ की दृष्टि से प्रधान होता है, तत्पुरुष समास कहलाता है।
उदाहरण –
शरणागत = शरण को आया हुआ
देशभक्ति = देश के लिए भक्ति
Tatpurush Samas ( तत्पुरुष समास )

तत्पुरुष समास में दोनों शब्दों के बीच आने वाले कारक चिन्हो का लोप हो जाता है। विग्रह करते समय इन कारक चिन्हों को पुनः जोड़ देते है। कर्ता और सम्बोधन कारकों के लोप होने से कोई समास नहीं बनता है, इन दोनों को छोड़कर शेष छह कारकों के लुप्त हुए चिन्हों के आधार पर इनके भेद निम्न है –

तत्पुरुष समास के भेद | Tatpurush Samas ke bhed

तत्पुरुष समास के भेद | Tatpurush Samas ke bhed
1. व्यधिकरण तत्पुरुष समास
2. समानाधिकरण तत्पुरुष समास

व्यधिकरण तत्पुरुष समास | Vyadhikaran Tatpurush Samas

तत्पुरुष समास का वह रूप जिसमें समास विग्रह करते समय प्रथम पद तथा द्वतीय पद दोनों भिन्न-भिन्न विभक्तियों का प्रयोग किया जाता है, उसे ‘व्यधिकरण तत्पुरुष समास’ कहते है। अर्थात मूल तत्पुरुष समास ही व्यधिकरण तत्पुरुष समास होता है।

उदाहरण :- ‘राज्ञ:पुरुष: – राजपुरुष:‘ इसमें प्रथम पद ‘राज्ञ:‘ षष्ठी विभक्ति में है तथा द्वितीय पद ‘पुरुष:‘ प्रथम विभक्ति में है। इस प्रकार दोनों पदों में भिन्न-भिन्न विभाक्तियां होने से यहाँ पर ‘व्यधिकरण तत्पुरुष समास’ है।

व्यधिकरण तत्पुरुष समास के भेद
व्यधिकरण तत्पुरुष समास के कुल 6 भेद है, जो कि इस प्रकार है:-

तत्पुरुष समासस के भेद | Tatpurush Samas ke bhed
1. कर्म तत्पुरुष समास
2. करण तत्पुरुष समास
3. संप्रदान तत्पुरुष समास
4. अपादान तत्पुरुष समास
5. संबंध तत्पुरुष समास
6. अधिकरण तत्पुरुष समास
Tatpurush Samas ( तत्पुरुष समास )

कर्म तत्पुरुष समास (Karam Tatpurush Samas)

1 . कर्म तत्पुरुष समास  इसमें कर्म कारक चिन्ह ‘को ‘ का लोप हो जाता है। 

कर्म तत्पुरुष समास के उदाहरण | Karam Tatpurush Samas Ke Udaharan

हस्तगत – हाथ को गया हुआ 
शरणागत – शरण को आया हुआ 
जेबकतरा – जेब को कतरने वाला 
खड्गधर – खड्ग ( तलवार ) को धारण करने वाला 
मरणातुर – मरने को आतुर 
रोजगारोन्मुख – रोजगार को उन्मुख 
घरफूँका – घर को फूंकने वाला 
सुखप्रद – सुख को देने वाला 
परलोकगमन – परलोक को जाना 
चिड़ीमार – चिड़ियों को मारने वाला 
प्राप्तोदक –  उदक (जल ) को प्राप्त 
कर्मोंमुख – कर्म को उन्मुख 
आदर्शोन्मुख – आदर्श को उन्मुख 
सुखकर  – सुख को करने वाला 
दिवाकर – दिवा  को करने वाला 
पाकेटमार  – पैकेट को मारने  वाला 
दिनकर  – दिन को करने वाला 
कमरतोड़ – कमर को तोड़ने वाला 
भंडाभोड़ – भण्डा ( राज ) को फोड़ने वाला 
विद्युतमपि  – विद्युत् को मापने वाला 
नरभक्षी  – नर को भक्षित करने वाला 
गगनचुम्बी – गगन को चूमने वाला 
मनोहर – मन को हरने वाला 
सुखप्राप्त – सुख को प्राप्त 
दुःखातीत – दुःख को अतीत 
गृहागत – ग्रह को आगत 
मुँहतोड़ – मुँह को तोड़ने वाला
चितचोर – चित  को चोरने वाला 
जलपिपासू – जल का पिपासु
जातिगत – जाति को गया हुआ 
कालातीत – कल को अतीत करके
पापहर – पाप को हरने वाला
तिलकुटा – तिल को कूटने वाला 
जगसुहाता – जग को सुहाने वाला 
ध्यानातीत – ध्यान को अतीत करके 
व्यक्तिगत – व्यक्ति को गत
विकासोन्मुख – विकास को उन्मुख 
तर्कसंगत – तर्क को संगत
देवाश्रित – देव को आश्रित 
आत्मविस्मृत – आत्मा को विस्मृत करने वाला 
जितेन्द्रिय – इन्द्रियों को जीतने वाला 
शरीरव्यापी – शरीर को व्यापा हुआ 

करण तत्पुरुष समास | Karan Tatpurush Samas

2. करण तत्पुरुष समास  इसमें करण कारक चिन्ह ‘से / के द्वारा ‘ का लोप हो जाता है। 

करण तत्पुरुष समास के उदाहरण | Karan Tatpurush Samas ke Udaharan

तुलसीकृत – तुलसी के द्वारा किया हुआ 
अकालपीड़ित – अकाल से पीड़ित 
अधिकारोन्मत – अधिकार से उन्मत 
अभावग्रस्त – आभाव से ग्रस्त 
जलावृत – जल से आवृत 
मनमानी – मन से मानी
मदांध – मद से अंध 
मुँह माँगा – मुँह से माँगा 
गुणयुक्त – गुणों से युक्त 
कष्ट साध्य – कष्ट से साध्य 
अकाल पीड़ित – अकाल से पीड़ित 
नीतियुक्त – नीति से युक्त 
रोगग्रस्त – रोग से ग्रस्त 
गुणयुक्त – गुणों से युक्त 
मनचाहा – मन से चाहा हुआ 
रसभरी – रस से भरी 
मनमाना – मन से माना
रस सिक्त – रस से सिक्त 
दुग्ध निर्मित – दुग्ध से निर्मित 
दोषपूर्ण – दोष से पूर्ण 
धर्मयुक्त – धर्म से युक्त 
धर्मांध – धर्म से अंध 
नरकभय – नरक से भय 
प्रकाशयुक्त – प्रकाश से युक्त 
प्रतीक्षातुर – प्रतीक्षा से आतुर 
प्रमाणसिद्ध – प्रमाण से सिद्ध 
प्रश्नाकुल – प्रश्न से आकुल 
प्रेमोन्मत – प्रेम से उन्मत 
फलाच्छादित – फल से आच्छादित 
बिहरिरचित – बिहारी द्वारा रचित 
बैलगाड़ी – बैल से चलने वाली गाड़ी 
भयभीत – भय से भीत 
भयाक्रांत – भय से आक्रांत 
भावाभिभूत – भाव से अभिभूत 
भावाविष्ट – भाव से आविष्ट 
भुखमरा – भूख से मरने वाला 
मीनाकारी – मीना से किया गया कार्य 
स्वचिंतन –  स्वयं के द्वारा चिंतन 
स्वर्णहार – स्वर्ण से बना हार
स्वार्थान्ध – स्वार्थ से अँधा 
शिरोधार्य – शिर से धारण करने वाला
प्रेमाविष्ट – प्रेम से आविष्ट 
माघ प्रणीत – माघ के द्वारा प्रणीत ( रचित ) 
ईश्वरदत्त – ईश्वर के द्वारा दिया हुआ 
आँखों देखा – आँखों के द्वारा देखा हुआ 

सम्प्रदान तत्पुरुष समास | Sampradan Tatpurush Samas

3. सम्प्रदान तत्पुरुष समास इसमें सम्प्रदान करक चिन्ह ‘ के लिए ‘ का लोप हो जाता है। 

सम्प्रदान तत्पुरुष समास के उदाहरण | Sampradan Tatpurush Samas Ke Udaharan

रसोईघर – रसोई के लिए घर 
रेलभाड़ा – रेल के लिए भाड़ा 
रोकड़बही – रोकड़ के लिए बही 
विद्यालय – विद्या के लिए आलय
विद्युतगृह – विद्युत् के लिए घर 
सभामंडप – सभा के लिए मंडप 
समाचार -पत्र – समाचार के लिए पत्र 
स्नानघर – स्नान के लिए घर 
हथकड़ी – हाथ के लिए कड़ी 
हवनकुंड – कवन के लिए कुंड
हवनसामग्री – हवन के लिए सामग्री 
रणक्षेत्र – रण के लिए क्षेत्र 
रणभूमि – रण के लिए भूमि 
निवास – रानियों के लिए वास 
रसायनशाला – रसायन के लिए शाला 
भंडारगृह – भंडार के लिए गृह
भूतबलि – भूत के लिए बलि
जनहित – जन के लिए हित
देवार्पण –  देव के लिए अर्पण 
देशभक्ति – देश के लिए भक्ति 
धर्मशाला – धर्म के लिए शाला 
नाट्यशाला – नाट्य के लिए शाला 
न्यायालय  – न्याय के लिए आलय
परीक्षाभवन – परीक्षा के लिए भवन 
पाठशाला –   पाठ के लिए शाला 
पौधशाला – पौधों के लिए शाला 
आरामकुर्सी – आराम के लिए कुर्सी 
आवेदनपत्र – आवेदन के लिए पत्र 
कर्णफूल – कर्ण के लिए फूल 
गुरुदक्षिणा – गुरु के लिए दक्षिणा 

अपादान तत्पुरुष समास | Apadan Tatpurush Samas

4. अपादान तत्पुरुष समास इसमें अपादान करक चिन्ह ‘से ( अलग होने के अर्थ में ) ‘ का लोप हो जाता है। 

अपादान तत्पुरुष समास के उदाहरण | Apadan Tatpurush Samas Ke Udaharan

नेत्रहीन – नेत्रों से हीन 
भाषाहीन – भाषा से हीन
कर्तव्य विमुख – कर्तव्य से विमुख
जन्मांध  – जन्म से अँधा
धर्मभ्रष्ट – धर्म से भ्रष्ट 
ह्रदयहीन – ह्रदय से हीन 
फल रहित  – फल से रहित
वीर विहीन – वीरो से विहीन  
गुणातीत – गुणों से अतीत 
जात बाहर – जाति से बाहर
पद दलित – पद से दलित
अवसरवंचित – अवसर से वंचित 
आकाशपतित – आकाश से पतित 
आशातीत – आशा से अतीत ( अधिक ) 
इन्द्रियातीत – इन्द्रियों से अतीत 
ईसापूर्व –  ईसा से पूर्व
ऋणमुक्त – ऋण से मुक्त 
कर्तव्यच्युत – कर्तव्य से च्युत 
कर्तव्यविमुख – कर्तव्य से विमुख 
कर्मभिन्न –  कर्म से भिन्न 
कामचोर – काम से जी चुराने वाला 
कार्यमुक्त – कार्य से मुक्त 
कालातीत – काल से अतीत 
क्रमागत – क्रम से आगत 
गर्वशून्य – गर्व से शून्य 
गुणरहित – गन से रहित 
गुणातीत – गुणों से अतीत 
जन्मरोगी – जन्म से रोगी 
जन्मोत्तर – जन्म से उत्तर 
दूरागत –  दूर से आगत 
देश निकाला – देश से निकाला 
दोषमुक्त  – दोष से मुक्त 
धर्मविमुख –  धर्म से विमुख 
धर्मविरत – धर्म से विरत 
पदमुक्त – पद से मुक्त 
बंधनमुक्त – बंधन से मुक्त 
बहिरागत –  बाहर से आगत 
भाग्यहीन – भाग्य से हिन् 
पापमुक्त – पाप से मुक्त 
राजद्रोह – राज्य से द्रोह 
लाभरहित – लाभ से रहित 

सम्बंध तत्पुरुष समास | Sambandh Tatpurush Samas

5. सम्बन्ध तत्पुरुष समास – इसमें संबंध कारक चिन्ह ‘ का, के, की‘ का लोप हो जाता है। 

सम्बंध तत्पुरुष समास के उदाहरण | Sambandh Tatpurush Samas Ke Udaharan

राजपुत्र – राजा का पुत्र
पराधीन – पर के अधीन
सिरदर्द – सर का दर्द
सत्रावसान – सत्र का अवसान 
सभापति – सभा का पति
धनपति – धन का पति
उल्कापात – उल्का का पात (गिरना )
मनाली – मनु का घर 
तमपुंज – तम का पुंज (समूह )
प्रेमोपकार – प्रेम का उपकार
सूर्योदय – सूर्य का उदय 
वाग्दान – वाणी का दान
चरित्रहनन – चरित्र का हनन
अछूतोद्धार – अछूतों का उद्धार 
अनारदाना – अनार का दाना 
अमचूर – आम का चूरा
आत्महत्या – आत्म की हत्या 
उल्कापात –  उल्का का पात
ऋषिकन्या – ऋषि की कन्या 
करोड़पति – करोड़ रुपयों का पति       
कर्मयोग  – कर्म का योग 
कार्यभार – कार्य का भार
खलनायक – खलों का नायक 
गंगाजल – गंगा का जल 
गृहपति – गृह का पति 
गोदान – गो का दान 
गोहत्या – गो की हत्या 
ग्रंथावली – ग्रंथो की अवली
घुड़दौड़ – घोड़ों की दौड़ 
जमींदार – ज़मीन का दार
जलधारा – जल की धारा
जलाशय – जल का आशय 
ठेकेदार – ठेके का दार 
दयानिधि – दया का निधि 
दीपशिखा – दीप की शिखा 
देशभक्त – देश का भक्त 
नगरसेठ – नगर का सेठ 
नरबलि –  नर की बलि 
नियमावली – नियमों की अवली 
पत्रोत्तर – पत्र का उत्तर 
पथपरिवहन – पथ का परिवहन 
भूकंप – भू का कम्प 
पथपरिवहन – पथ का परिवहन 
फुलवाड़ी – फूलों की वाड़ी
प्रश्नोत्तर – प्रश्न का उत्तर 
प्राणदान – प्राणों का दान 
मतदाता – मत का दाता
मनोविकार – मन का विकार 
यदुवंश  – यदु (यादव ) का वंश 
रंगभेद – रंग का भेद 
राजभाषा – राज्य की भाषा 

अधिकरण तत्पुरुष समास | Adhikaran Tatpurush Samas

6. अधिकरण तत्पुरुष समास – इसमें अधिकरण कारक चिन्ह ‘में , पर ‘ का लोप हो जाता है। 

अधिकरण तत्पुरुष समास के उदाहरण | Adhikaran Tatpurush Samas Ke Udaharan

लोकप्रिय – लोक में प्रिय 
वाक्चातुर्य – वाक् में चातुर्य 
कलानिपुण – कला में निपुण 
कर्माधीन – कर्म पर अधीन 
कार्यकुशल – कार्य में कुशल 
भगवल्लीन – भगवान में लीन 
कर्मनिष्ठ – कर्म में निष्ठ 
डिब्बाबंद – डिब्बे में बंद 
धर्म प्रवृत – धर्म में प्रवृत 
कर्मरत – कर्म में रत 
जगबीती – जग पर बीती हुई 
जलकौआ – जल में रहने वाला कौआ 
जलपोत – जल पर चलने वाला पोत
जलमग्न – जल में मग्न 
जलयान – जल पर चलने वाला यान 
जेबघड़ी – जेब में रहने वाली घड़ी 
पर्वतारोहण – पर्वत पर आरोहण
पुरुषसिंह – पुरुषों में सिंह 
मृत्युंजय – मृत्यु पर विजय 
सर्वव्याप्त – सर्व में व्याप्त 
रणवीर – रण में वीर 
वनवास – वन में वास 
सभापंडित – सभा में पंडित   
सर्वोत्तम – सर्व में उत्तम
धर्मरत – धर्म में  रत
जलमग्न – जल में मग्न 
मुनिश्रेष्ठ   – मुनियो में श्रेष्ठ
दानवीर – दान में वीर 
आत्मनिर्भर – आत्म पर निर्भर 
कविराज   – कवियों में राजा
कविवर  – कवियों में वर
आपबीती   – अपने पर बीती हुई
हरफनमौला  – हर फन में मौला
देशवासी – देश में वास करने वाला 
पुरुषसिंह – पुरुषों में सिंह 
कानाफूसी – कान में फुसफुसाहट 

समानाधिकरण तत्पुरुष समास | Samanadhikaran Tatpurush Samas

तत्पुरुष समास का वह रूप जिसका समास विग्रह करते समय पूर्व और पर पद में एक ही विभक्ति ( कर्ता कारक ) का प्रयोग किया जाता है, उसे समानाधिकरण तत्पुरुष समास कहा जाता है।

समानाधिकरण तत्पुरुष समास के भेद | Samanadhikaran Tatpurush Samas ke bhed

समानाधिकरण तत्पुरुष समास के 6 भेद होते है –
1. अलुक़ तत्पुरुष समास
2. नञ तत्पुरुष समास
3. उपपद तत्पुरुष समास
4. लुप्तपद तत्पुरुष
समास
5. कर्मधारय तत्पुरुष समास
6. द्विगु तत्पुरुष समास

अलुक़ तत्पुरुष समास | Aluk Tatpurush Samas

I . अलुक़ तत्पुरुष – इस समास में बाह्य दृष्टि से तो कारकीय परसर्गो का लोप हो जाता है किन्तु आंतरिक दृष्टि से नहीं। अर्थात हिंदी के विभक्ति चिन्हो का लोप हो जाता है किन्तु संस्कृत के विभक्ति चिन्ह ज्यों के त्यों बने रहते है। 

अलुक़ तत्पुरुष समास के उदाहरण | Aluk Tatpurush Samas ke Udaharan

युदिष्ठिर – युद्ध में स्थिर रहने वाला 
सरसिज – सर (तालाब ) में सृजित होने वाला 
मनसिज – मन में सृजित होने वाला ( कामदेव) 
शुभंकर – शुभ को करने वाला
मृत्युंजय – मृत्यु को जय करने वाला 
अंतेवासी – समीप में वास करने वाला 
खेचर – आकाश में विचरण करने वाला 
धुरंधर – धुरी को धारण करने वाला 

कुछ अन्य उदहारण भी है जिनमे संस्कृत के विभक्ति चिन्हो का प्रयोग नहीं हुआ है –  

जैसे –
चूहेदानी – चूहे की दानी 
बच्चेदानी – बच्चे की दानी 
थानेदार – थाने का दार
ऊंटपटांग – ऊँट पर टांग

नञ तत्पुरुष समास | Nay Tatpurush Samas

(II) नञ तत्पुरुष  – जिस समास के पूर्व पद में निषेधसूचक अथवा नकारात्मक शब्द जैसे अ ,न, ना, गैर  आदि लगे हो , उसे नञ तत्पुरुष समास कहते है। 

नञ तत्पुरुष समास के उदाहरण | Nay Tatpurush Samas ke Udaharan

अजन्मा – न जन्म लेने वाला
अटल – न टलने वाला 
अडिग – न टिकने वाला 
अशोच्य – नहीं है शोचनीय जो 
अनासक्त – आसक्ति के रहित
नापसंद – नहीं है पसंद जो 
नीरस – बिना रस के
नामुराद – नहीं है मुराद जो

उपपद तत्पुरुष समास | Uppad Tatpurush Samas

(III) उपपद तत्पुरुष – तत्पुरुष समास में द्वितीय पद प्रधान होता है वैसा इस समास में नहीं होता। इस समास में द्वितीय पद पूर्ण रूप से प्रथम पद पर आश्रित होता है। 

उपपद तत्पुरुष समास के उदाहरण | Uppad Tatpurush Samas ke Udaharan

जलचर – जल में विचरण करने वाला 
नभचर – नभ में  विचरण करने वाला
थलचर – थल में विचरण करने वाला 
चर्मकार – चर्म का कार्य करने वाला
गीतकार – गीत का कार्य करने वाला
जलधि – जल को धारण करने वाला 
वारिधि – वारि को धारण करने वाला 

लुप्तपद तत्पुरुष समास | Luptpad Tatpurush Samas

(IV) लुप्तपद तत्पुरुष – 
इस समास में दोनों पदों के मध्य प्रयुक्त होने वाले कारकीय उपसर्गो के साथ-साथ समस्त योजक शब्दों का लोप हो जाता है। 

लुप्तपद तत्पुरुष समास के उदाहरण | Luptpad Tatpurush Samas ke Udaharan

रसगुल्ला – रस में डूबा हुआ गुल्ला
रसमलाई – रस में डूबी हुई मलाई 
बैलगाड़ी – बैलो से चलने वाली गाड़ी
जेबघड़ी – जेब में रहने वाली घड़ी 
जलपोत – जल में चलने वाला पोत
स्वर्णहार – स्वर्ण से बना हुआ हार
पर्णशाला – पर्ण से बनी हुई शाला

तत्पुरुष समास के कर्मधारीय समास एवं द्विगु समास के बारे में पढ़ने के लिए निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करे –

5. कर्मधारय समास 
6. द्विगु समास 

यह भी पढ़े – समास

तत्पुरुष समासस के भेद | Tatpurush Samas ke bhed
1. कर्म तत्पुरुष समास
2. करण तत्पुरुष समास
3. संप्रदान तत्पुरुष समास
4. अपादान तत्पुरुष समास
5. संबंध तत्पुरुष समास
6. अधिकरण तत्पुरुष समास 

समास के अन्य भेद –
1. अव्ययी भाव समास 
2. कर्मधारय समास 
3. द्विगु समास 
4. द्वंद्व समास 
5. बहुब्रीहि समास

दोस्तो हमने इस आर्टिकल में Tatpurush Samas in Hindi के साथ – साथ Tatpurush Samas kise kahate hain, Tatpurush Samas ki Paribhasha, Tatpurush Samas ke bhed के बारे में पढ़ा। हमे उम्मीद है आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। आपको यहां Hindi Grammar के सभी टॉपिक उपलब्ध करवाए गए। जिनको पढ़कर आप हिंदी में अच्छी पकड़ बना सकते है।

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