प्रतीप अलंकार किसे कहते है? | प्रतीपपकार की परिभाषा और उदाहरण

प्रतीप अलंकार की परिभाषा

प्रतीप अलंकार | Pratip Alankar – प्रतीप अलंकार, अर्थालंकार का भेद है। यहां पर हम प्रतीप अलंकार की परिभाषा तथा उदाहरण के बारे में पढ़ने जा रहे हैं, प्रतीप अलंकार की सम्पूर्ण जानकारी आपको इस लेख में मिल जाएगी। पोस्ट के अंत में आपके लिए परीक्षापयोगी महत्त्वपूर्ण प्रश्न दिए गए है।


प्रतीप अलंकार की परिभाषा –

प्रतीप का अर्थ ‘उल्टा’ होता है। जहाँ पर उपमा के अंगों में उलटफेर करने से अर्थात उपमेय को उपमान के समान न कहकर उलटकर उपमान को ही उपमेय कहा जाता है, तो वहाँ पर ‘प्रतीप अलंकार’ होता है।

जहाँ पर प्रसिद्ध उपमान को उपमेय तथा उपमेय को उपमान सिद्ध करके उपमेय की उत्कृष्टता वर्णित की जाती है वहां प्रतीप अलंकार होता है।

प्रतीप अलंकार का अर्थ –
‘प्रतीप’ का अर्थ होता है ‘उल्टा’ या ‘विपरीत’। यह ‘उपमा’ का उल्टा होता है।

प्रतीप अलंकार के उदाहरण | Pratip alankar ke udaharan –
 'काहे करत गुमान मुख सम मंजु मयंक।'
यहाँ पर भी उपमान चन्द्र को उपमेय और उपमेय मुख को उपमान बनाकर चन्द्रमा की हीनता सूचित की गयी है।
सिय मुख समता किमि करै चन्द वापुरो रंक।
यहां सीताजी के मुख (उपमेय)की तुलना बेचारा चन्द्रमा (उपमान) नहीं कर सकता। उपमेय की श्रेष्टता प्रतिपादित होने से यहां 'प्रतीप अलंकार' है।
प्रतिप अलंकार के उदाहरण | Pratip alankar ke udaharan –
  1. अली ! मथैली-बदन- सो जानि परै अरविन्द।
  2. सीय- बदन सम हिमकर नाहीं।
  3. काहे करत गुमान ससि ! तव समान मुख मंजू ।’
  4. का घूंघट मुख मूंदहु, अबला नारि !
  5. कल्पवृक्ष केहि काम को, जब हैं नृप जसवंत।
  6. तो मुख जैसो है कमल, कह्य कवन विधि जाया?
  7. “नेत्र के समान कमल है।”
  8. बहुत विचार किन्ही मन माहीं, सीय वदन सम हिमकर नाहीं।
  9. ‘दृग आगे मृग कछु न ये !’
  10. चन्द्रमा मुख के समान सुन्दर हैं।
  11. संत-हृदय नवनीत समाना।
    कहा कविन, पै कहाइ न जाना।।
  12. उसी तपस्वी से लंबे थे, देवदार दो चार खड़े।
  13. करै प्रकाश प्रताप तब, कहा भानु को काज ?
    जब प्रताप ही प्रकाश कर देता है तो सूर्य व्यर्थ है।
  14. ‘काहे करत गुमान मुख, मुख सम मंजू मयंक।’
  15. तिछन नैन कटाच्छ तें मंद काम के बान !

Questions

Q 1. प्रतीप अलंकार किसे कहते है?
जहाँ पर प्रसिद्ध उपमान को उपमेय तथा उपमेय को उपमान सिद्ध करके उपमेय की उत्कृष्टता वर्णित की जाती है वहां प्रतीप अलंकार होता है।

Q 2. प्रतीप अलंकार के उदाहरण बताइए
1. काहे करत गुमान ससि ! तव समान मुख मंजू ।’
2. का घूंघट मुख मूंदहु, अबला नारि !
3. कल्पवृक्ष केहि काम को, जब हैं नृप जसवंत।
4. तो मुख जैसो है कमल, कह्य कवन विधि जाया?
5. “नेत्र के समान कमल है।”

Q. 3. प्रतीप अलंकार की परिभाषा बताइए
जहाँ पर उपमा के अंगों में उलटफेर करने से अर्थात उपमेय को उपमान के समान न कहकर उलटकर उपमान को ही उपमेय कहा जाता है, तो वहाँ पर ‘प्रतीप अलंकार’ होता है।





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