दैत्य (राक्षस) शब्द के रूप : Daitya Shabd Roop in Sanskrit

दैत्य (राक्षस) शब्द के रूप : – इस लेख में हम आपके लिए संस्कृत के शब्द रूप टॉपिक के दैत्य (राक्षस) शब्द के रूप लेके आये है यहाँ आपको इसकी सभी विभक्तियाँ एवं सभी वचन दिए गए दोस्तों यह संस्कृत ग्रामर का बहुत ही महत्वपूर्ण टॉपिक है इस टॉपिक से हमेशा प्रश्न पूछे जाते है तो लिए चलिए इस को पढ़ते और याद करते है –

Daitya Shabd Roop – दैत्य शब्द अजन्त (अकारांत) पुल्लिंग संज्ञा शब्द है। सभी पुल्लिंग संज्ञाओ के रूप इसी प्रकार बनाते है जैसे- देव, बालक, राम, वृक्ष, गृह, मास, इन्द्र, कृष्ण, गोविन्द, गुण, चन्द्र, भक्त, केश, कलश, पाद, ब्राह्मण, कृषक, आपण, अध्याय, लोक, वृषभ, अधर, वानर, कपोत, अनेक, शिष्य, शूद्र, गज, दिवस, घट, गोत्र, शिव, सुर, अश्व, काक, खग, असुर, ईश्वर, छात्र, सूर्य, आश्रम, मानव, उद्यान, कूप, आकाश, ग्राम, उत्सव, लोक, गीत, जन, जनक आदि।

दैत्य (राक्षस) शब्द के रूप ( Daitya Shabd Roop in Sanskrit )

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमादैत्यःदैत्यौदैत्याः
द्वितीयादैत्यम्दैत्यौदैत्यान्
तृतीयादैत्येनदैत्याभ्याम्दैत्यैः
चतुर्थीदैत्यायदैत्याभ्याम्दैत्येभ्यः
पंचमीदैत्यात् / दैत्याद्दैत्याभ्याम्दैत्येभ्यः
षष्‍ठीदैत्यस्यदैत्ययोःदैत्यानाम्
सप्‍तमीदैत्येदैत्ययोःदैत्येषु
सम्बोधनहे दैत्य!हे दैत्यौ!हे दैत्याः!
Daitya Shabd Roop in Sanskrit
विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमादैत्यःदैत्यौदैत्याः
द्वितीयादैत्यम्दैत्यौदैत्यान्
तृतीयादैत्येनदैत्याभ्याम्दैत्यैः
चतुर्थीदैत्यायदैत्याभ्याम्दैत्येभ्यः
पंचमीदैत्यात् / दैत्याद्दैत्याभ्याम्दैत्येभ्यः
षष्‍ठीदैत्यस्यदैत्ययोःदैत्यानाम्
सप्‍तमीदैत्येदैत्ययोःदैत्येषु
सम्बोधनहे दैत्य!हे दैत्यौ!हे दैत्याः!
Daitya Shabd Roop in Sanskrit

1. ‘त्वम्’ किस शब्द और वचन का रूप है?
(क) तू शब्द और प्रथमा एकवचन का
(ख) युष्मद् शब्द और प्रथमा एकवचन का
(ग) अस्मद् शब्द और प्रथमा एकवचन का
(घ) स शब्द और तृतीया एकवचन का

2. ‘युष्मद्’ का द्वितीया बहुवचन में कौन-सा रूप होगा?
(क) त्वाम्
(ख) युष्मान्
(ग) यूयम्
(घ) युवाम्

3. ‘अस्मद्’ शब्द का’अस्मत्’ रूप किस विभक्ति और वचन में बनता है?
(क) प्रथमा बहुवचन में ।
(ख) षष्ठी एकवचन में।
(ग) पञ्चमी बहुवचन में
(घ) सप्तमी एकवचन में

4. ‘तद्’ सर्वनाम नपुंसकलिंग का’ तस्मै’ रूप बनता है
(क) प्रथमा में
(ख) चतुर्थी में
(ग) पञ्चमी में
(घ) सप्तमी में

5. ‘वाग्भिः’ रूप किस विभक्ति के किस वचन का है? ।
(क) तृतीया के बहुवचन का।
(ख) चतुर्थी के द्विवचन का।
(ग) षष्ठी के द्विवचन का
(घ) सप्तमी के एकवचन का

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