असंगति अलंकार किसे कहते है? | Asangati Alankar की परिभाषा और उदाहरण

असंगति अलंकार की परिभाषा

असंगति अलंकार परिभाषा,उदाहरण || Asangati Alankar in hindiअसंगति अलंकार अर्थालंकार के अंतर्गत आता है, इस पोस्ट में हम असंगति अलंकार की परिभाषा तथा असंगति अलंकार के प्रकार के बारे में पढ़ेंगे। इस टॉपिक से सम्बंधित समस्त जानकारी आपको इस लेख में मिल जाएगी। इस पोस्ट के अंत में आपके लिए परीक्षापयोगी महत्त्वपूर्ण प्रश्न दिए गए है।

असंगति अलंकार किसे कहते है?

परिभाषा – संगति तभी होती है जब कारण और कार्य एक ही स्थान पर घटित होते हैं किंतु असंगति में एक ही समय में कारण एक स्थान पर तथा कार्य अन्य स्थान पर घटित होता वर्णित किया जाता है।

अर्थात – जहां कारण एक ही स्थान पर तथा कार्य अन्य स्थान पर वर्णित किया जाए वहां असंगति अलंकार होता है।

असंगति अलंकार के उदाहरण –
तुमने पैरों में लगाई मेहंदी
मेरी आंखों में समाई मेहंदी।
मेहंदी लगाने का काम पाँव में हुआ है किंतु उसका परिणाम आंखों में दृष्टिगत हो रहा है इसीलिए यहां असंगति अलंकार है।
दृग उरझत टूटत कुटुम, जुरत चतुर चित प्रीति। 
परत गाँठ दुरजन हिये, दई नई यह रीति।।
पिचका चलाइ और जुवती भिजाइ नेह,
लोचन नचाइ मेरे अंगहि नचाइ गौ।।
 यहां पर क्रिया कृष्ण के नेत्रों में होती है, लेकिन प्रभाव गोपी के अंग पर होता है। उसका अंग-अंग उसके लोल-लोचनों के कटाक्ष में नाच उठता है। अतः यहाँ ‘असंगति’ अलंकार’ है।

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